वैशाली से गिरफ्तार हुए लखनऊ के वैज्ञानिक डॉ. लाल सिंह गंगवार से ठगी करने वाले दो साइबर ठग

गाजियाबाद ब्यूरो। लखनऊ स्थित भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिक डॉ. लाल सिंह गंगवार को बीमा पॉलिसी की यूनिट वैल्यू से ज्यादा मैच्योरिटी अमाउंट दिलाने के नाम पर साइबर ठगों ने 3,66,890 की ठगी की थी। अपराध 14 मार्च 2025 से 24 मार्च 2025 के बीच हुआ था। मामले में यूपी एसटीएफ की टीम ने बृहस्पतिवार को दो आरोपियों को गाजियाबाद के वैशाली से गिरफ्तार किया। इनमें राजनगर एक्सटेंशन स्थित चार्म्स कैसल सोसायटी निवासी दीपक तिवारी और गौतमबुद्धनगर के बिसरख थानाक्षेत्र के चिपियाना स्थित दुर्गा एनक्लेव निवासी बादल वर्मा हैं। दोनों ने वैशाली के क्लाउड 9 बिल्डिंग में अपना फर्जी बीमा कार्यालय खोल रखा था। पूछताछ में दोनों ने वैज्ञानिक से ठगी की बात स्वीकार की है।
यूपी एसटीएफ की तरफ से शुक्रवार देर शाम जारी हुई जानकारी में बताया गया कि एसटीएफ के अपर पुलिस अधीक्षक विशाल विक्रम सिंह की टीम वैज्ञानिक डॉ. लाल सिंह गंगवार के साथ हुई ठगी की जांच कर रही थी। छानबीन करने के बाद आरोपियों को ट्रेस कर शुक्रवार शाम करीब पांच बजे एसटीएफ की टीम ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में दीपक तिवारी ने बताया कि वह वर्ष 2012 से 2015 तक नोएडा सेक्टर दो स्थित दा विजन लाइफ इंश्योरेंस ब्रोकर कंपनी में टेलीकॉलिंग प्रतिनिधि बतौर काम कर चुका है। इसके अलावा वर्ष 2016 से 2020 तक कार्यालयों में किराये पर कंप्यूटर लगाने और वर्ष 2022 में राजनगर एक्सटेंशन में भैयाजी नाम से रेस्तरां संचालित करने के व्यापार में उसे बड़ा आर्थिक नुकसान हुआ था। इसकी वजह से वह कर्ज में डूब गया।
दिसंबर 2024 में उसकी मुलाकात प्रेम चौधरी नामक व्यक्ति से हुई। प्रेम चौधरी ने उसे एक फर्जी बीमा कार्यालय खोलने को कहा और फिर वह प्रेम व बादल के साथ मिलकर साइबर ठगी का धंधा चलाने लगे। वहीं, आरोपी बादल वर्मा ने एसटीएफ को बताया कि करन शर्मा व प्रेम चौधरी के साथ उसकी कई वर्षों से दोस्ती थी। वर्ष 2019 से 2020 तक वह निजी टेलीकॉम कंपनी में कर्मचारी रहा था। वर्ष 2021 से अगस्त 2024 तक एक माइक्रो फाइनेंस कंपनी में टेली कॉलर की नौकरी की। इसके बाद फरवरी 2025 से दीपक तिवारी, प्रेम चौधरी व करन शर्मा के साथ मिलकर बीमा साइबर फ्रॉड का काम करने लगा। एसटीएफ की पूछताछ में सामने आया कि दोनों पिछले करीब सात माह में सैकड़ों लोगों से कमीशन पर अधिग्रहित किए 15-20 अलग-अलग बैंक खातों में साइबर फ्रॉड कर करीब 50-60 लाख रुपये जमा करा चुके हैं। इनके पास से सात मोबाइल, दो लैपटॉप, दो आधार कार्ड, दो ड्राइविंग लाइसेंस, तीन डेबिट कार्ड, दो-दो वोटर कार्ड एवं पैन कार्ड और लोगों से ठगी करने का डाटा रखने वाले पांच रजिस्टर बरामद हुए हैं।
यह लोग गूगल की मदद से सरकारी संस्थानों में कार्यरत लोगों की जानकारी प्राप्त करते थे। खुद को बीमा कंपनी का अधिकारी बताकर उनका विश्वास हासिल करते थे। इसके बाद बीमा पॉलिसी के पूरा होने पर यूनिट वैल्यू से अधिक रकम दिलाने का झांसा देते थे। झांसे में लेने के बाद पीड़ितों के बीमा एजेंटों का कोड पॉलिसी में से हटाने के लिए 20 हजार से 90 हजार तक का शुल्क लेते थे। रकम अलग-अलग बैंक खातों में जमा होती थी जो 20 प्रतिशत के कमीशन पर करन शर्मा व प्रेम चौधरी लेते थे। पीड़ित से रकम मिलने पर आरोपी इंटीग्रेटेड ग्रीवेंस मैनेजमेंट सिस्टम (आईजीएमएस), इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (आईआरडीएआई), नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) के अधिकारियों के हस्ताक्षरित फर्जी दस्तावेज भेजकर ठगी करते थे।




